विनय विश्वास

कविता
आँसुओं की जगह
एक नालायक़ अकेला
कल बड़े का पेपर है
घर मेरा घर
छोड़ देने के काम भी माँ आई
मिठास
तुम्हारी वो आँखें
मैं तुमसे प्‍यार करता हूँ
शायद उसको इश्क़ हुआ था
सुनो मर्दो
सुबह-सुबह खिल उठी सुबह
स्‍टेयरिंग थामती उँगलियाँ