अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
01.04.2016


दीवाली

लो फिर दीवाली आई
राम वनवास काट अयोध्या वापस आये
फिर घरों में दीप जले
फिर मिठाइयाँ बँटी
फिर ख़ुशियाँ मनाई गयीं
फिर लाये गए पटाखे
और साथ लाये गए
उन मासूम बच्चों के जिस्म
जो पटाखे बनाते बनाते
ख़ुद बारूद हो गए


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें