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ISSN 2292-9754

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12.08.2014


ज़िंदगी

 कुछ अतीत की स्मृतियों के भीगे-से पल,
कुछ भविष्य के सपनों की धुँधली-सी तस्वीरें,
और बस,
सृजनहीन वर्तमान का प्रतिक्षण,
यूँ ही हाथों से फिसलते जाना….

कितना सिमट जाती है ज़िंदगी कभी-कभी!


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