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ISSN 2292-9754

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06.06.2017


मूल कहानी – दि इंटरप्रेटर ऑफ मैलडीज़ (अंग्रेज़ी)
लेखिका : झुम्पा लाहिरी
वेदना का व्याख्याकार
अनुवादक : विकास वर्मा

भाग- 1

चाय की दुकान पर मिस्टर और मिसेज़ दास इस बात पर झगड़ने लगे कि टीना को टॉयलेट कौन लेकर जायेगा। आख़िर में मिसेज़ दास तब मानीं जब मिस्टर दास ने याद दिलाया कि पिछली रात बच्ची को उन्होंने नहलाया था। मिस्टर कापसी ने रियरव्यू मिरर1 में देखा कि पिछली सीट पर मिसेज़ दास अपनी शेव की हुई और काफ़ी हद तक बेपर्दा टाँगों को खिसकाती हुईं, उनकी बड़े आकार वाली सफ़ेद अम्बेसडर से धीरे-धीरे बाहर आईं। रेस्ट रूम की तरफ़ जाते हुए उन्होंने छोटी बच्ची का हाथ नहीं पकड़ा।

वे कोणार्क का सूर्य मन्दिर देखने जा रहे थे। शनिवार का शुष्क, साफ़ दिन था। धीमी-धीमी समुद्री हवाएँ जुलाई-मध्य की गर्मी से राहत दिला रही थीं। कुल मिलाकर, घूमने के लिए एक आदर्श मौसम। मिस्टर कापसी आमतौर पर रास्ते में इतनी जल्दी नहीं रुकते थे, लेकिन उस सुबह जब उन्होंने होटल सैंडी विला के सामने उस परिवार को गाड़ी में बिठाया, तो बमुश्किल पाँच मिनट भी नहीं बीते थे कि छोटी बच्ची ज़िद करने लगी। मिस्टर कापसी ने जब मिस्टर और मिसेज़ दास को अपने बच्चों के साथ होटल के बरामदे में खड़े देखा था, तो उनका ध्यान सबसे पहले इस बात पर गया कि वे काफ़ी जवान थे, शायद अभी तीस के भी नहीं थे। टीना के अलावा उनके दो लड़के थे, रॉनी और बॉबी, जो उम्र में लगभग एक जैसे ही नज़र आ रहे थे और जिनके दाँतों पर चाँदी के चमकदार तार लगे थे। देखने में तो यह परिवार हिन्दुस्तानी नज़र आता था लेकिन उनका पहनावा विदेशियों जैसा था। बच्चों के कपड़े कड़क और चटख रंग के थे और उनकी टोपियों में पारदर्शी वाइज़र2 लगे थे। मिस्टर कापसी विदेशी पर्यटकों को सँभालने के अभ्यस्त थे; नियमित तौर पर इनकी ज़िम्मेदारी उन्हें सौंपी जाती थी क्योंकि वे अंग्रेज़ी बोल सकते थे। अभी कल ही उन्होंने स्कॉटलैंड से आए एक प्रौढ़ दम्पति को घुमाया था। दोनों के चेहरों पर धब्बे थे और उनके रोयेंदार सफेद बाल इतने बारीक़ थे कि उनकी धूप से झुलसी खोपड़ी की खाल तक नज़र आ रही थी। इनके मुक़ाबले, मिस्टर और मिसेज़ दास के चमकदार, युवा चेहरे काफ़ी आकर्षक लग रहे थे। जब मिस्टर कापसी ने अपना परिचय दिया तो उन्होंने अभिवादन में अपनी दोनों हथेलियों को जोड़ लिया था, लेकिन मिस्टर दास ने एक अमेरिकी की तरह हाथों को कुछ इस तरह दबाया कि मिस्टर दास को अपनी कोहनी में थोड़ा दर्द महसूस हुआ था। मिसेज़ दास ने अपनी ओर से उनमें कोई दिलचस्पी दिखाए बिना बस औपचारिक रूप से मुस्कराते हुए अपने मुँह का एक कोना झुका दिया था।

जब वे चाय की दुकान पर इंतज़ार कर रहे थे, तो रॉनी, जो दोनों लड़कों में बड़ा लग रहा था, ज़मीन पर खूँटे से बँधी एक बकरी को देखकर अचानक, जिज्ञासावश, पिछली सीट से बाहर की तरफ़ लपका।

"उसे मत छूना," मिस्टर दास ने कहा। उन्होंने अपनी पेपरबैक टूर बुक, जिस पर पीले अक्षरों में "इंडिया" लिखा था और जिसे देखकर लगता था कि वह विदेश में ही छपी थी, से नज़र हटाकर ऊपर की ओर देखा। उनकी आवाज़, पता नहीं क्यों, संकोची और कुछ तीखी-सी थी, जिसे सुनकर लगता था जैसे वह अभी पूरी तरह से परिपक्व नहीं हुई थी।

"आई वॉन्ट टू गिव इट ए पीस ऑफ़ गम,"3 लड़के ने तेज़ी से आगे बढ़ते हुए पीछे मुड़कर कहा।

मिस्टर दास कार से बाहर आए और ज़मीन पर एक-आध बार उट्ठक-बैठक कर अपने पैरों की वर्जिश करने लगे। वह बिना दाढ़ी-मूँछ के साफ़ चेहरे वाले आदमी थे जो बिल्कुल रॉनी का बड़ा संस्करण लग रहे थे। उनके सिर पर नीले रंग का वाइज़र था, और उन्होंने शॉर्ट्स4, स्नीकर्स5 और टी-शर्ट पहनी हुई थी। उनकी गर्दन में टँगा कैमरा, जिसमें एक बड़ा टेली-फोटो लेंस और कई सारे बटन और निशान बने थे, एकमात्र ऐसी जटिल चीज़ मानी जा सकती थी जो उन्होंने डाली हुई थी। उन्होंने रॉनी को बकरी की तरफ़ भागते देख त्योरी तो चढ़ाई, पर ऐसा लगा नहीं कि उसे रोकने में उनकी कोई दिलचस्पी थी। "बॉबी, ध्यान रखो तुम्हारा भाई कोई बेवकूफी वाली हरकत न करे।"

"मुझे ऐसा करने का कोई शौक नहीं," बॉबी ने बिना हिले कहा। वह मिस्टर कापसी के साथ आगे की सीट पर बैठा, गाड़ी के ग्लव-कम्पार्टमेंट6 पर बनी गणेश जी की तस्वीर को ध्यान से देख रहा था।

"चिंता की कोई बात नहीं है," मिस्टर कापसी ने कहा। "ये पालतू हैं।" मिस्टर कापसी छियालीस साल के थे और उनके बाल, जो कम होते जा रहे थे, पूरी तरह से सफेद हो गए थे, लेकिन उनका हल्का भूरा रंग और बेतरतीब भौंहें, जिनपर खाली समय में वह कमल के तेल से बना बाम लगाते थे, देखकर आसानी से यह अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि जवानी के दिनों में वह कैसे दिखते होंगे। उन्होंने ग्रे पतलून और उससे मैच करती जैकिट-स्टाइल की कमीज़ पहनी थी जो कमर की तरफ़ तंग थी और जिसकी बाहें छोटी थीं। कमीज़ का कॉलर बड़ा और नोकदार था और यह बारीक लेकिन टिकाऊ सिंथेटिक कपड़े की बनी थी। उन्होंने इस तरह की बनावट और कपड़े के लिए अपने दर्ज़ी को विशेष हिदायत दी थी- टूर पर जाने के लिए यह उनकी पसंदीदा पोशाक थी क्योंकि घंटों गाड़ी चलाने के दौरान भी यह ख़राब नहीं होती थी। गाड़ी के शीशे से उन्होंने देखा कि रॉनी ने बकरी का चक्कर लगाया, तेज़ी से उसे एक तरफ़ से छुआ, और फिर पीछे कार की तरफ़ भाग गया।

"आपने बचपन में ही हिन्दुस्तान छोड़ दिया था?" मिस्टर कापसी ने पूछा जब मिस्टर दास एक बार फिर से गाड़ी की सीट पर बैठ चुके थे।

"ओह, मीना और मैं दोनों अमेरिका में ही पैदा हुए थे," मिस्टर दास ने सहसा आत्म-विश्वास के साथ घोषणा की। "पैदा भी हुए और पले-बढ़े भी। हमारे माँ-बाप अब यहाँ आसनसोल में रहते हैं। वे रिटायर हो चुके हैं। हम हर दो साल में उनसे मिलने आते हैं।" जब छोटी बच्ची कार की तरफ़ दौड़ी तो वह मुड़कर उसे देखने लगे। उसकी गर्मी की पोशाक की चौड़ी बैंगनी पट्टियाँ उसके छोटे-छोटे भूरे कन्धों पर झूल रही थीं। उसने पीले बालों वाली एक गुड़िया अपने सीने से चिपका रखी थी, जिसे देखकर ऐसा लगता था जैसे बतौर सज़ा किसी ने कुन्द धार वाली कैंची से उसके बाल काट दिए हों। "टीना पहली बार इंडिया आई है, है ना टीना?"

"अब मुझे दोबारा बाथरूम नहीं जाना," टीना ने ऐलान किया।

"मीना कहाँ है," मिस्टर दास ने पूछा।

मिस्टर कापसी को अजीब लगा कि छोटी बच्ची से बात करते वक़्त मिस्टर दास अपनी पत्नी का नाम ले रहे थे। टीना ने उस तरफ़ इशारा किया जहाँ मिसेज़ दास चाय की दुकान पर काम करने वाले एक आदमी, जो कमीज़ नहीं पहने था, से कुछ ख़रीद रही थीं। जब मिसेज़ दास कार की तरफ़ वापस आने लगीं तो मिस्टर दास ने सुना कि बिना कमीज़ के आदमियों में से एक किसी लोकप्रिय हिन्दी प्रेम-गीत के कुछ बोल गुनगुनाने लगा। लेकिन ऐसा लगा नहीं कि मिसेज़ दास को गाने के बोल समझ में आए, क्योंकि न उन्होंने ग़ुस्सा दिखाया, न शर्मिन्दगी, और न ही किसी दूसरे तरीक़े से उस आदमी की इस हरकत का जवाब दिया।

उन्होंने ध्यान से मिसेज़ दास को देखा। वह लाल और सफेद खानों वाली घुटनों तक की स्कर्ट, चौकोर लकड़ी की हील वाले स्लिप-ऑन शूज़7 और पुरुषों के बनियान जैसा दिखने वाला क्लोज़-फिटिंग ब्लाउज़ पहने थीं। ब्लाउज़ पर आगे की तरफ़ स्ट्रॉबेरी8 के आकार के कैलिको ऐप्लीक9 की सजावट थी। वह एक छोटे क़द की महिला थीं जिनके छोटे-छोटे हाथ पंजों की तरह थे। उनकी उँगलियों के नाखूनों का गुलाबी रंग उनके होठों से मैच कर रहा था, और अपनी क़द-काठी में वह कुछ गोल-मटोल-सी थीं। उनके बाल जो उनके पति के बालों से बस थोड़े ही लम्बे कटे थे, एक तरफ़ काफ़ी नीचे की ओर माँग निकालकर काढ़े गए थे। वह गहरे भूरे रंग का बड़ा धूप का चश्मा पहने थीं जिस पर गुलाबी रंग चढ़ा था, और उनके पास एक बड़ा स्ट्रॉ बैग10 था जो लगभग उनके धड़ जितना बड़ा और कटोरे के आकार का था और एक पानी की बोतल उसमें से झाँक रही थी। वह धीरे-धीरे चल रही थीं और अख़बार के काग़ज़ से बना एक पैकेट पकड़े हुए थीं जिसमें मूँगफली और मिर्च-मसाले के साथ अच्छी तरह मिलाए गए मुरमुरे थे। मिस्टर कापसी मिस्टर दास की ओर मुड़े।

"अमेरिका में आप कहाँ रहते हैं?"

"न्यू ब्रुंसविक, न्यू जर्सी।"

"न्यू यॉर्क के पास?"

"जी हाँ। मैं वहाँ मिडल स्कूल में पढ़ाता हूँ।"

"कौन सा सब्जेक्ट?"

"साइंस। दरअसल, हर साल मैं अपने स्टूडेंट्स को न्यू यॉर्क में म्यूज़ियम ऑफ नैचुरल हिस्टरी की सैर के लिए ले जाता हूँ। एक तरह से आप कह सकते हैं कि हम दोनों में काफ़ी कुछ एक जैसा है, आपमें और मुझमें। आपको बतौर एक टूर गाइड कितना वक़्त हो गया, मिस्टर कापसी?"

"पाँच साल।"

मिसेज़ दास कार के पास पहुँच गईं। "अभी पहुँचने में कितनी देर लगेगी?" उन्होंने दरवाज़ा बन्द करते हुए पूछा।

"लगभग ढाई घंटा," मिस्टर कापसी ने जवाब दिया।

इस पर मिसेज़ दास ने अधीर होते हुए एक आह भरी, जैसे कि वह बिना रुके अपनी पूरी ज़िंदगी सफ़र करती आ रही हों। वह अंग्रेज़ी में लिखी एक बॉम्बे फ़िल्म मैगज़ीन को मोड़कर, उससे अपनी हवा करने लगीं।

"मैंने सोचा था कि सूर्य मन्दिर पुरी से सिर्फ़ अट्ठारह मील नॉर्थ में है।" मिस्टर दास ने टूर बुक को थपथपाते हुए कहा।

"कोणार्क की तरफ़ जाने वाली सड़कें अच्छी हालत में नहीं हैं। असल में यह रास्ता बावन मील का है," मिस्टर कापसी ने स्पष्ट किया।

मिस्टर दास ने सिर हिलाया और उस जगह से कैमरे का पट्टा दोबारा ठीक किया जहाँ उसकी रगड़ से उनकी गर्दन का पिछला हिस्सा दुखने लगा था।

- क्रमशः
भाग - 1, 2

संकेत

1. कार में आगे की तरफ़ लगा शीशा जो पीछे देखने के काम आता है।
2. टोपी में आगे की ओर निकला हुआ भाग।
3. "मैं इसे च्यूइंग गम देना चाहता हूँ।"
4. हाफ-पैंट (छोटी पतलून)।
5. एक प्रकार के जूते।
6. गाड़ी में आगे की तरफ़ सामान रखने के लिए बना स्थान जिसे खोला- बन्द किया जा सकता है।
7. एक प्रकार की जूतियाँ।
8. एक फल का नाम।
9. एक प्रकार का डिज़ाइन।
10. एक प्रकार की सूखी घास से बना थैला।


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