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05.03.2012
 
वर्ष 2005 की मंगल कामनाएँ
विजय विक्रान्त

नव वर्ष की मंगल कामनाएँ,
मिल आज सभी स्वीकार करो।
हो सुखों से भरा हुआ वर्ष नवीन,
हर मन में शान्ति विचार धरो।।

नफ़रत से भरी इस दुनिया में,
आओ प्यार का दीप जलाएँ हम।
अपने जो हैं हम से रूठ गए,
चलो जाकर उन्हें मनाएँ हम।।

ईर्ष्या व द्वेष और कटुता को,
हम दिल से बाहर करें।
यह शत्रु हमारे हैं सब से बड़े,
इन पे हम विजय प्राप्त करें।।

बड़े पुण्य करम करने पर,
इन्सान का चोला मिला हम को।
इसे व्यर्थ न यूँ ही गँवाएँ हम,
शुभ कामों में लगाएँ सदा इसको।।

सब खाली हाथ यहाँ आए,
और खाली हाथ ही जाएँगे।
सब धरा यहीं रह जाएगा,
और काम न अपने भी आएँगे।।

करो प्रण कि करम हम ऐसे करें,
जो जन समाज के हित में हों।
और फल को त्यागने की इच्छा
की प्रबल शक्ति इस दिल में हो।।

क्या लेना यहाँ क्या देना यहाँ,
सब मोह माया का है चक्कर।
इस चक्कर के चक्कर से
निकलने का, नाम भी है चक्कर।।

फिर वीर अभिमन्यु की भान्ति तुम,
इस चक्रव्यूह को डालो तोड़।
और बाहर निकलने पर पाओगे,
नई दिशाएँ और नित नए मोड़।।

नए साल में यही दिशा और मोड़,
कुछ नई उमंगें लाएँगे।
इन नई तरंगों की धुन पर,
हम गीत यह सब मिल गाएँगे।।

वर्ष नव सभी को फूल-फले,
सुख शान्ति का सब मिल रस पाएँ।
और प्रेम मार्ग पर चलते हुए,
हमारे कदम कभी न डगमगाएँ।।


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