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ISSN 2292-9754

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12.31.2015

 
स्वामी विवेकानन्द के अनमोल वचन
विजय विक्रान्त

  • उठो, निडर बनो, दृढ़ रहो। सारी ज़िम्मेदारी अपने कन्धों पर लो और यह जान लो कि अपने भाग्य के रचियता आप स्वयं हैं।
  • प्रत्येक आत्मा में ईश्वर का वास होता है। हमारा उद्देश्य वाह्य और आन्तरिक व्यवहार पर नियंत्रण द्वारा भीतर के ईश्वर को प्रकट करना है। कार्य या पूजा या मानसिक अथवा दार्शनिक नियंत्रण, इन में से चाहे एक, या ज़्यादा या इन सभी के माध्यम से ऐसा करो और उन्मुक्त होकर जियो। यही धर्म है। शिक्षाएँ या धर्म सिद्धांत या धर्मविधि या धार्मिक पुस्तकें या मन्दिर, मूर्तियाँ सभी गौण बातें हैं।
  • आप जैसा सोचेंगे वैसे ही बनेंगे। अगर आप स्वयं को कमज़ोर सोचते हो तो आप कमज़ोर ही होंगे। यदि आप स्वयं को ताकतवर सोचेंगे तो आप ताकतवर ही बनोगे। हम जो चाहते हैं वही शक्ति है इसलिये अपने आप मैं विश्वास रखो। हमें लोहे की माँस पेशियाँ तथा स्टील की नसें चाहिए।
  • मेरे युवा दोस्तो, मेरी आप को सलाह है कि मज़बूत बनो। आप गीता पढ़ने की बजाए फुटबाल खेलकर स्वर्ग पहुँच सकते हैं।
  • जो स्वार्थी है वह अनैतिक है और जो निस्वार्थी है वह नैतिक है।

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