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ISSN 2292-9754

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11.29.2014


पतझड़

पतझड़ के मौसम में
एक पेड़ के पत्ते थे उदास उदास
एक दूजे से बिछुड़ने के सदमे से
सहमे सहमे अलविदा कह रहे थे
तभी एक अक्लमन्द पत्ते ने कहा
"ग़म न करो कुछ महीनों बाद
ही हम फिर जन्म लेंगे
और फिर मिलेंगे इसी पेड़ पर!"


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