दीवान
अच्छे बुरे की पहचान
...
अब मकाँ होते हैं कभी घर
..
इन्सान की हर ख्वाहिश..
कुछ इस तरह से
ज़िन्दगी...
ना मिली छाँव कहीं यूँ ....
ये धूपछाँव क्या है ये
...
सब खामोश हैं यहाँ
कोई...
साथ मेरे रही उम्र भर
ज़िंदगी