अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
08.04.2014


मोहब्बत

तुम अपने हाथों की मेहँदी में
मेरा नाम लिखती थी और
मैं अपनी नज़्मों में तुझे पुकारता था जानां;

लेकिन मोहब्बत की बाते अक्सर किताबी होती हैं
जिनके अक्षर
वक़्त की आग में जल जाते हैं
किस्मत की दरिया में बह जाते हैं;

तेरे हाथों की मेंहदी से मेरा नाम मिट गया
लेकिन मुझे तेरी मोहब्बत की क़सम,
मैं अपने नज़्मों से तुझे जाने न दूँगा...

ये मेरी मोहब्बत है जानां !!


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें