विजय कुमार सप्पत्ति

कविता
अलविदा
आँसू
आज मेरे शहर ने मुझे ...
आया नव वर्ष आया
तू
दर्द
परायों के घर
पूरे चाँद की रात
मोहब्बत
मौनता
सिलवटों की सिहरन
कहानी
अमृत वृद्धाश्रम