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ISSN 2292-9754

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10.16.2016


ख़्वाबो मेरे ख़्वाबो

ख़्वाबों मेरे ख़्वाबों कभीतो आराम करो
कितना और उड़ोगे कहीं तो अब शाम करो

थक कर बैठी हूँ मैं पीछे तुम्हारे भागते-भागते
आँ-मिचोली के इस खेल में तुम हाथ कभी न आते
इतनी ऊँची पींगे तुम्हारी कभी तो ढलान करो
ख़्वाबो मेरे ख़्वाबोंकभी तो आराम करो

आँखों में तुम जब सजते हो रोशन हो जाता है जग मेरा
पर पल में ग़ायब होने की ज़िद में टूट ही जाता है मन मेरा
अपने सतरंगी मौसम से जीवन मेरा गुलफ़ाम करो

ख़्वाबो मेरे ख़्वाबोंकभी तो आराम करो
कितना और उड़ोगे कहीं तो अब शाम करो


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