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| 01.05.2008 |
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फागुन की मीठी धूप वीणा विज 'उदित' |
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अध खिली धूप में अँगड़ाई लें मेथी आलू गोभी मूली के पराँठे उम्रों की गवाह बूढ़ी नानी दादी खुले गगन की हदें नापते नव पंछी खुला शीत लहर से ठिठुरा बदन |
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