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प्रारम्भ से ही नृत्य व नाटक में भी
गहन अभिरुचि रही, जिसके फलस्वरूप सन १९८३ से दूरदर्शन से जुड़ गयीं। सन २०००
तक ढेरों नाटकों, टेली फिल्मों में भी अभिनय किया। आकाशवाणी जालंधर से आप
अपनी कविताएँ सुनाती रहती हैं। अब प्रति वर्ष तकरीबन छह माह अमेरिका में
रहते हुए ये अपना अधिकतर समय लिखने पढ़ने में बिताती हैं। साहित्य की
सेवास्वरूप विभिन्न प्रतिष्ठित पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में भी साथ ही
साथ लिखती रहीं। सन १९९९ में प्रथम काव्य संग्रह 'सन्नाटों के पहरेदार' व
सन २००४ में कथा संग्रह 'पिघलती शिला' छ्पा। दूसरा काव्य संग्रह प्रेस में
है। अभी भी राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका 'कादम्बनी', 'समय सुरभि, 'सम्पर्क',
'पंजाबकेसरी', 'अजीत समाचार' आदि में निरंतर लिख रही हैं। सन २००३ में
ह्यूस्टन, अमेरिका में आयोजित 'काव्य सम्मेलन' में आपको सम्मानित किया गया।
इंटरनेट पर विभिन्न जाल-पत्रिकाओं में इन्हें पढ़ा जा सकता है। इन्हें
'सिल्वर स्टार' प्राप्त हुआ है।\ |