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ISSN 2292-9754

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05.18.2017


मैंने देखा है तुम्हें

मैंने देखा है तुम्हें -
सुमन की हँसी में
पूनम के शशि में
बच्चों की मुस्कान में
कोयल की तान में
मीरा के भजन में
भौरों के गुँजन में
झरनों के कलकल में
उत्सव की हलचल में
ईश्वर की मूरत में
ममता की सूरत में
सीप के मोती में
मंदिर की ज्योति में
भूखे की रोटी में
अलहड़ की चोटी में
प्रेम के हवन में
भक्ति के भवन में
छाँव में धूप में
हर ब्रह्म रूप में
तुम प्यार हो मेरा
आनंद मुझमें भरा
तुमसे दृष्टि मेरी
अद्भुत सृष्टि तेरी


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