उपेन्द्र परवाज़

दीवान
अब हमने हैं खोजी नयी ये वफ़ायें
उनकी निगाहों के वार देखिये
तूफ़ानों में उनके छोड़ जाने...
वफ़ायें तो हुई है अब..
कविता
ओ मातृभूमि तेरी जय होये
त्राहि-त्राहि मची हो
वही तो रक्त है