ठाकुर दास "सिद्ध"

दीवान
अँधेरा इस कदर फैला
अर्क पिया सूरज का यारा
उसकी तरफ़ इशारा
ऐ सनम
चमन की सैर पर सरकार निकले हैं
तरुणाई को चुप कराना चाहता है
ताक में शैतान बैठा
दिल से न लगाने का
नफ़रत की बातें वो घर-घर करेगा
फ़साद से
भरोसा न कीजे
हर मरहले का सामने नक़्शा अगर होता
हास्य कविता
खिंच जाएगी खाल