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आज लोग हमें पेटू कहते हैं
क्योंकि हम पेट भर खाते हैं
कच्चा-पक्का सब पचाते हैं
दर्द उन्हें होता है
क्योंकि वे नहीं जानते
इतिहास क्या होता है।
हमारा भूख से रोना
उनकी खुशी की गिजा होता है।
उन्हें दर्द यही होता है
भारत चैन से क्यों सोता है।
क्योंकि वे नहीं जानते
इतिहास क्या होता है।
मेरे पुरखे भूख से रोते थे
ज़मींदार चैन की बंसी बजाते थे।
बच्चों के लिए हलाल कमाते थे
खुद की भूख कोड़े मिटाते थे।
आज वक़्त बदला है
संपन्नता में हमारा नंबर अगला है।
बस यही उन्हें कचोटता है
हर कोई हमें नीचे गिराने को
बार-बार सोचता है।
नाकाम,
हर बार नाकामी से
सिर नोचता है,
क्योंकि वे नहीं जानते
इतिहास क्या होता है।
जिन बच्चों ने दिन भर
खेत में घास काटी
माँ उस घास को आने-दो आने में बेच पाती,
भूख का ग्रास बनने से बचने को
बच्चों ने घास को सीढ़ी बनाया
वक़्त ने साथ दिया
और आज
उन्होंने अपने बच्चों के साथ
चमचमाते रेस्तरां में भर पेट खाया।
यही खुशहाली देख
दुनिया को मरोड़ होता है
क्योंकि वे नहीं जानते
इतिहास क्या होता है।
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