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| 05.31.2008 |
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बेज़ार चिड़िया |
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आँगन में ओंधे मुँह पड़ी लाचार चिड़िया मुँह में झाग, आँखों में बेचारगी मैं दौड़ा, हथेली पर उठाया, सहलाया कटोरी में पानी, होठों पर इल्तिजा \डूबती आँखें, मौत से संघर्ष जतन किए हजार, सब गए बेकार क्यों... आखिर क्यों...? मुझे पानी नहीं, पंख दे दो |
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