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| 04.05.2009 |
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कहने को तो उनकी वो मेहरबानियाँ हैं |
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कहने को तो उनकी वो मेहरबानियाँ हैं झुकी नज़रों से जो सह जाएँ हर सितम, लड़ता है जो आज अपने हक़ की लड़ाई, स्वर्ण अक्षरों में लिखा है जो नाम जहां में, किसी की जान, किसी की अस्मत को ख़तरा है, आतंक से सहमी ज़िन्दगियाँ देख
के नहीं, |
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