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| 04.05.2009 |
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आईनों की तरह दिल को भी रहने दो |
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आईनों की तरह दिल को भी रहने दो खड़ी न करो तुम यूँ दिवारे दिलों के बीच, यूँ ही न तोडों तुम रिश्ता मुहब्बत से, भले ही चुन लो तुम फूल सारे ख़ुशियों के, जला तो दिया है तुमने दिल-ओ-दरीबा मेरा, |
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