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04.05.2009
 

आईनों की तरह दिल को भी रहने दो
तरूण सोनी "तन्वीर"


आईनों की तरह दिल को भी रहने दो
कुछ मिलने-मिलाने का रास्ता भी रहने दो

खड़ी न करो तुम यूँ दिवारे दिलों के बीच,
एक झरोखा तो प्यार का भी रहने दो

यूँ ही न तोडों तुम रिश्ता मुहब्बत से,
मुझसे नहीं तो, किसी ओर से भी रहने दो

भले ही चुन लो तुम फूल सारे ख़ुशियों के,
कुछ ख़ार ग़मों के मेरे लिए भी रहने दो

जला तो दिया है तुमने दिल-ओ-दरीबा मेरा,
कम से-कम ये राख तो मेरे लिए भी रहने दो


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