तरूण सोनी "तन्वीर"

कविता
आओ प्रिये! आओं
ज़ख़्म
बस यही सुर्ख़ियाँ हैं
महाभारत
रेखाचित्र इन्सान
यथार्थ
दीवान
अब हर रोज दीये जलाने से
आईनों की तरह दिल को भी
कहने को तो उनकी वो
रात को फिर कोई
हर बस्ती-बस्ती में जल रहे