तरुण भटनागर


कविता

असगरी बाई की आवाज़
कभी
बंद और खुली आँखें
बंद पृष्ठों में
बरसों से....
सीढ़ियाँ
हवा के नीचे और ऊपर

कहानी
कोठरी और आकाश
गुलमेंहदी की झाड़ियाँ
छूटा हुआ भगवान
फोटो का सच
बीते शहर से फिर गुजरना

हैलियोफोबिक