डा० (श्रीमती) तारा सिंह


कविता

आ रहा है गाँधी फिर से
काँटों से सेवित है मानवता...
दीप्ति ही तुम्हारी सौन्दर्यता है

परिधिपरिधि में घूमता हूँ मैं
समझ न सका नियति नटी ...
होली

दीवान

अरमां है, तुम्हारे दर्दे गम की
आँख उनसे मिली तो सजल ...
कैसे कह दूँ, जिसे दिल में ..
भीड़ भरी सड़कें सूनी - सी ..
मुसलमान कहता मैं उसका हूँ
मेरी आँखों में किरदार ....
मैं काला तो हूँ, आप जितना..
मोहब्बत के जज़्बे ...
मोहब्बत में अश्क़ की कीमत
सड़कें ख़ून से लाल हुईं
हृदय मिले तो मिलते ...

समीक्षा

शाश्वत सत्य को रेखांकित करता कविता संग्रह (समीक्षक: श्री कृष्ण मिश्र)
लोकमंगल की भावना की अभिव्यक्ति है डा० तारा सिंह का नवीन कविता संग्रह -
"तम की धार पर डोलती जगती की नौका"

(समीक्षक : कृष्ण मित्र)
विषाद नदी से उठ रही ध्वनि
छायावादी कविताओं का संकलन

(समीक्षक: श्री कृष्ण मिश्र)
अलंकारिक संवेदनाओं का संकलन
(समी़क्षक-श्री कृष्ण मित्र)
यह जग केवल स्वप्न असार
समीक्षक : डॉ० रमेश कुमार सोनी
प्रकृति चित्रण का द्रष्टव्य काव्य संकलन
सिमट रही संध्या की लाली
समीक्षक : कृष्ण मित्र

आप-बीती

यह कैसी श्रद्धांजलि, यह कैसा प्यार