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11.13.2007
 

कैसे मनाते हैं होली, हिन्दी सोसाइटी सिंगापुर के बच्चे

सुषमा श्रीवास्तव

हिन्दी सोसाइटी सिंगापुर में भारतीय बच्चों को हिन्दी पढ़ाने के साथ साथ तीन प्रमुख त्योहार - होली, रक्षा बंधन और दीपावली बड़े उमंग से मनाते हैं। विद्यालय शनिवार को लगता है इसलिए होली के निकटतम शनिवार को आधा दिन पढ़ाई होती है। उसके बाद आरंभ होता है होली के अवसर पर तैयार किया गया विशेष कार्यक्रम।

विद्यालय के विशाल हॉल में सभी बच्चे कक्षानुसार पंक्तिबद्ध होकर बैठते हैं। मुख्य अतिथि के आते ही सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया जाता है। जिसमें बच्चे होली पर आधारित कविता, नाटक, भाषण और होली नृत्य प्रस्तुत करते हैं। होलिया में उड़ो रे गुलाल.... की स्वर लहरी के साथ करतल ध्वनियाँ वातावरण को उल्लासमय बना देती हैं। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे बच्चे सबका मन मोह लेते हैं। इसके बाद होली की पहेली, गुलाल से चेहरा रँगने की प्रतियोगिता आदि संपन्न होती है। समस्त अध्यापिकाएँ मिलकर लोक गीत पेश करती हैं, “आज बिरज में होली रे रसिया.... ढोलक की थाप के साथ क्या समाँ बँधता है, बताने की आवश्यकता नहीं!

इसी बीच अध्यापिका अपनी कक्षा के बच्चों के गुलाल का टीका लगाती है, इसका मुख्य कारण है कि स्वच्छता बनी रहे वरना सिंगापुर और होली....... ना, बाबा ना!! बड़ी शालीनता से होली मनाते हैं। काश! भारत में भी ऐसा होता। घर जाते समय सबको मिठाई मिलती है। बच्चे भरपूर आनंद उठाते हैं। अन्त में जलपान का भी प्रबंध किया जाता है।



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