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ISSN 2292-9754

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03.15.2017


तू मेरे राह नहीं

जाने के साथ मेरे, पतझर चला जाएगा
ख़ामोशी का आलम, मंज़र चला जाएगा

नासमझी के और न, फेंको पत्थर इधर-उधर
छुट के तेरे हाथ कभी गुहर चला जाएगा

माँग अंगूठे की करते समय न सोचा होगा
एक ग़रीब का सरमाया , हुनर चला जाएगा

मेरे हक़ में ये कौन, गवाही देने आया
सुन के ज़माने की बातें, मुकर चला जाएगा

रौनक़ महफ़िल की देख न ठहरा जाए हमसे
सदमों में ये दिल आप उठ कर चला जाएगा

शायद मै सीख लूँ, जीना तेरे बग़ैर सुशील
तू मेरे राह नहीं कि, मुड़कर चला जाएगा


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