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ISSN 2292-9754

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02.19.2016


साथ मेरे हमसफ़र

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साथ मेरे हमसफ़र वो साथिया नहीं है
लुत्फ़ मरने में नहीं, जीने का मज़ा नहीं है

रूठ कर चल दिए तमाम सपने-उम्मीद
इस जुदाई ज़िन्दगी का ज़ायका नहीं है

साथ रहता था बेचारा बेज़ुबान सा दिल
ठोकरें, ख़ामोश खा के भी गिना नहीं है

आ क़रीब से जान ले, ख़ुदगर्ज हैं नहीं हम
फूल से न रंज, कली हमसे खफ़ा नहीं है

शौक़ से लग जो गया, उनके गले तभी से
लाइलाज ए मरीज़ हूँ, मेरी दवा नहीं है


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