अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
01.01.2016


भूख की कालिमा भारी है

चरही से चुट्टूपालू की दूरी
बस वालों से मत पूछो
उनसे पूछो जो ढलती रात के अँधेरों में
भटकती आत्माओं की तरह
बिना पैडल की साईकिल में
ढो रहे हैं कोयले की बोरियाँ

एक तो कोयला खदानों से उड़ती क्रूर काली धूल
ऊपर से पौ फटने की बाट जोहती रात का घोर अँधेरा
मुश्किल है बता पाना कि सबसे काला क्या है

इससे पहले कि सूरज की पहली किरण रांची पहुँच जाए
जलेबीदार पठारी घाटियों में
चरही से चुट्टूपालू की चढ़ाई पार कर पहुँच जाना चाहते हैं
बिना पैडल की साईकिल पर कोयला ढोने वाले ये लोग

अक्सर बड़ी-बड़ी मशीनों तक तन्त्र के हाथ नहीं पहुँच पाते
और अवैध खनन के इन छोटे पुर्जों की गिरफ़्तारी हो जाती है
खनन माफ़िया कालिख के धंधे के सबसे बड़े सफ़ेदपोश हैं
कोयलांचल के अख़बारों में ख़बरें छपती हैं और
बार-बार बिना पैडल की साईकिल वाले लोग ही
अवैध खनन में लिप्त पाए जाते हैं
ठीक वैसे ही जैसे नाजायज़ संतानें सिर्फ औरतों की होती हैं

बहरहाल
झारखण्ड की सियासी सरगर्मियों और कारोबारी उथल-पुथल से इतर
नेशनल हाईवे तैंतीस की ऊँची पठारी घाटियों से होकर
पेट की जंग में अँधेरे के विरुद्ध
बिना पैडल की साईकिल वाले लोगों की मुसलसल यात्रा ज़ारी है
मतलब, कोयले और अंधकार पर भूख की कालिमा भारी है ।

शब्दार्थ :
चरही से चुट्टूपालू : झारखंड में हजारीबाग से रांची के बीच स्थित दो पठारी घाटियाँ, जहाँ से राष्ट्रीय राजमार्ग तैंतीस घुमावदार चढ़ाई से होकर गुजरता है।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें