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| 02.16.2008 |
| बंद होठों को अब तुम्हें खोलना चाहिये सुशील कुमार |
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बंद होठों को अब तुम्हें खोलना चाहिये । चुप रहे इतने दिन, दुःख सहे कितने दिन हे शिवरुपा, हे आद्याशक्ति, हे कपाल-कुंडला |
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