सुशील कुमार


कविता

अपने हृदय की ओर
तुम्हारे हाथ
ठूँठ होते पहाड़
ढीली पड़ती मुट्ठियाँ
पहाड़ का दुःख
पहाड़िया
पहाड़ी नदी के बारे ें
बंद होठों को अब तुम्हें ...
बाँसलोय में बहत्तर ऋतु
महुआ के फूलने के मौसम में
माँ अब

मैं पहाड़ की बेटी

आलेख

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