अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली

मुख पृष्ठ
04.30.2014


इस रूट की सभी लाइनें व्यस्त हैं

देह में फाँस-सा यह समय है
जब अपनी परछाईं भी संदिग्ध है
'हमें बचाओ, हम त्रस्त हैं' --
घबराए हुए लोग चिल्ला रहे हैं
किंतु दूसरी ओर केवल एक
रेकॉर्डेड आवाज़ उपलब्ध है --
'इस रूट की सभी लाइनें व्यस्त है'

न कोई खिड़की, न दरवाज़ा, न रोशनदान है
काल-कोठरी-सा भयावह वर्तमान है
'हमें बचाओ, हम त्रस्त हैं' --
डरे हुए लोग छटपटा रहे हैं
किंतु दूसरी ओर केवल एक
रेकॉर्डेड आवाज़ उपलब्ध है --
'इस रूट की सभी लाइनें व्यस्त हैं'

बच्चे गा रहे वयस्कों के गीत हैं
इस वनैले-तंत्र में मासूमियत अतीत है
बुद्ध बामियान की हिंसा से व्यथित हैं
राम छद्म-भक्तों से त्रस्त हैं
समकालीन अँधेरें में
प्रार्थनाएँ भी अशक्त हैं ...
इस रूट की सभी लाइनें व्यस्त हैं


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें