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ISSN 2292-9754

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04.01.2015


कौन हो तुम

मृगमरीचिका सी
मेरे सामने होती हो
कौन हो तुम जो
हरपल शूल सी चुभती हो ....!

मेरे अन्तःस्थल का
आक्रोश हो या
प्रतिशोध की कोई ज्वाला
कौन हो तुम जो
अक्सर मुझे जलाती हो ....!!

मेरे हृदय का सुमधुर
स्पंदन हो या
वेदनाओं का कोई राग
कौन हो तुम जो
साज़ नवीन बजाती हो .....!!!

जीवन के मरुस्थल में तुम
सावन की बरसात नहीं
राग विराग की नगरी में
तुम कोई सौगात नहीं
फिर....... ???

कौन हो तुम जो
नींदों से मुझे जगाती हो.....!!!!


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