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02.23.2008

 
परिचय  
 
नाम :

सुरेशचन्द्र शुक्ल शरद आलोक

  गत २८ वर्षों से विदेशों में (नार्वे में) हिन्दी पत्रिकाओं परिचय, स्पाइल-दर्पण और वैश्विका का सम्पादन करने वाले सुरेशचन्द्र शुक्ल शरद आलोक का प्रवासी साहित्यकारों में महत्वपूर्ण स्थान है। हिन्दी साहित्य में वेदना, रजनी, नंगे पाँवों का सुख, दीप जो बुझते नहीं, संभावनाओं की तलाश, नीड़ में फँसे पँख और गंगा से ग्लोमा तक प्रकाशित काव्य संग्रह और अर्धरात्रि का सूरज और प्रवासी कहानियाँ इनके प्रकाशित कहानी संग्रह है। नार्वे, स्वीडेन और डेनमार्क का कुछ बाल व अन्य साहित्य और कविताओं का अनुवाद इन्होंने हिन्दी में किया है।
सम्पर्क : speil.nett@gmail.com