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01.03.2008
 

ओस्लो में 20 नवम्बर
सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’


नार्वे में 20 नवम्बर
शीत लहर और बरफबारी
रोक न सकी जुलूस में
सैंकड़ो हाथों में जल उठी मशालें
नाजीवाद-नसलवाद को दुनिया के
सभी देशों की गलियों में
समाप्त करने की तैयारी।
नयी पीढ़ी की त्योरियाँ लगी
आश्वस्त और प्रौढ़,
तने हुए सीनों पर जोश
नाजीवाद-नसलवाद के विरुद्ध
सेन्ट्रल रेलवे स्टेशन से
पार्लियामेन्ट के सामने तक
कारवाँ चल पड़ा
मेरे मन में हलचलें उठी अनेक
काश यह रुके नहीं
पहुँचे यह विश्व के हर नगर और ग्राम
सुबह शाम मानवता पर चिन्तन
वासुदेव कुटुम्भकम
फैल जाये हवा में
पहुँचे जन-जन की साँस में
मानवतावाद हो धर्म की मशाल
भूखे को भरपेट भोजन
बीमार असहाय को दवा
दुआओं का कैसे करें भरोसा
धर्म के नाम पर छले गये बहुत
धर्म के नाम पर भावनायें भड़कायी गयीं
धर्म के नाम पर हो रहे हैं युद्ध
पढ़ने के लिए बहुत है मानवता की पोथी
भेदभाव नहीं चाहिये।
नहीं चाहिये चारदीवारी की गुलामी
स्त्री-पुरुष और गरीब-अमीर सब करें
एक साथ भोजन
मिलकर बाटें भारत के दर्द
विश्व के दर्द स्वत: मिट जायेंगे
गर मिलकर अलाव हम जलायेंगे
आँखों में बँधी
ऊँच-नीच भेदभाव की पट्टी हटायेंगे।


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