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आज फिर ढलने लगी है शाम, प्रिय देखो ज़रा।
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आज फिर ढलने लगी है शाम, प्रिय देखो ज़रा। यह पुकुर का मुकुर कितना हो रहा अभिराम? प्रिय देखो ज़रा। आज फिर ढलने लगी है शाम, प्रिय देखो ज़रा। याकि कालिय पर थिरकते पीतपट घनश्याम। प्रिय देखो ज़रा। आज फिर ढलने लगी है शाम, प्रिय देखो ज़रा। उतर आया व्योम पीने झील का सौन्दर्य यह उद्याम।
प्रिय देखो ज़रा। |