अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
02.26.2016


दुनिया / ज़िंदगी
(हाइकु)

कितने रंग
ज़िंदगानी के संग
गिन सकोगे

मिली ज़िन्दगी
कब वापस जाए
पता ही नहीं

ज़िंदगी तो है
मौत की धरोहर
लौटानी होगी

माँगी नहीं थी
मिल गयी ज़िंदगी
करें शुक्रिया

प्यार से पली
अनुभवों में ढली
धनी ज़िंदगी

एक अनेक
व्यापक या संकीर्ण
दृष्टि दुनिया

पुराने दिन
कहाँ गई दुनिया
अच्छी दुनिया

दिन बदले
बदली नहीं दुनिया
वहीं की वहीं


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें