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ISSN 2292-9754

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05.09.2016


ये भी तेरा

डाल दिया मैंने
जीत की ख़ुशी का बोझ
आप के कन्धों पर

और ये शिकायत भी जाती रही
कि मैं बहुत निठल्ला हूँ।

ख़ुश हैं न
कहते थे न कि मैं
सिर्फ सपने देखता हूँ

सचमुच ये कोई सपना ही था
और कितना सच था
आज महसूस करो।

आज जब मैंने
डाल दिया है
तुम्हारी जीत की ख़ुशी का
बोझ तुम्हारे कन्धे पर
यक़ीनन ये एक तोहफ़ा था
तुम्हारा मेरे पास
समय का दिया हुआ
और मैंने तुम्हे लौटाया
बस।


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