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ISSN 2292-9754

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12.09.2015


प्रेम की सम्भावना

प्रेम की सम्भावना में
डूबने से पहले आओ,
आओ अपनी अधूरी मुलाकातों के
सिलसिले बढ़ाएँ
हाँ अभी कल कि बात सुनो
मैं था शब्द थे
सुनहरी किरणें आकाश से उतरकर
हवा में फ़ैल रही थीं
अपना राज्य बना रही थीं
परिंदे चहक रहे थे
पेड़ों की पत्तियाँ हवाओं कि
थाप पर नाच रही थीं
फूल खिलखिला रहे थे
हवा महक रही थी
ख़ुशनुमा परिवेश था
आनंद था, उल्लास था
आशा थी, विश्वास था
सौंदर्य उमड़ रहा था
ख़ुशहाली चहक रही थी।
ऐसे में
किसी पदचाप कि आहट थी
कितना मुश्किल होता है ऐसे
परिवेश से विरक्त होना
लेकिन
शब्द धमाके कि तरह गूँजे
तहस नहस करते हुए मनोहारी
परिवेश को
अँधेरे में गुम हो गए
मैं भी नहीं रहा.
तो आओ ढूँढे
प्रेम की संभावना में डूबने से पहले
अँधेरे में गुम हुए शब्दों को!


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