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ISSN 2292-9754

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06.15.2017


पत्थर

आसमान में सुराख़ हुआ
अँधेरे में दिया जल उठा
और उसको बुझाने की
कोशिश में आँधी
ठहर गयी
वाह रे मेरे सनम
के पत्थर।


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