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ISSN 2292-9754

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06.15.2017


माँ हो न!

आज जब पूरा देश
जश्न में हैं आज़ादी के
हम तुम्हारी याद के
सफ़र में है
तपती ज़मीन और
गर्म हवाओं की
दहक में पिघलता हुआ वजूद
और तुम्हारे आँचल की
हवा का एक झोंका
बदल गया सब कुछ
मौसम भी नज़र भी
नज़रिया भी
माँ हो न
कितना ख़्याल रखती हो।

नया प्रेम है
हमारा तुमसे
आज बस तुम हो
और आज़ादी का ख़याल है।


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