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ISSN 2292-9754

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03.06.2016


एक बार फिर

एक बार फिर हम
लौटकर आएँगे आप के शहर में
वहीं जहाँ हमने इंतज़ार किया है
आप का इतने दिनों तक
एक उम्मीद में।

हम लौटकर आएँगे वहीं
आप के शहर में
जहाँ हमारी आवाज़
आप के सुभचिंतकों की
फुसफुसाहट में खो गयी थी
एक आग बन गयी थी
डरने लगे थे आप हमारी
प्रेम भरी आवाज़ से।

हम लौटकर आएँगे
आप के शहर में
जब हमें लगने लगेगा
आप के शहर में
जंगल का दस्तूर बदलने लगा है
फुसफुसाहट का नशा उतरने लगा है
समझने लगे हैं आप अपनी
ज़िम्मेदारी
गा रहें हैं हमारे गीत
सुन रहे हैं हमारा संगीत
और तैयार हुए बैठे हैं
चलने को अपनी
निर्धारित मंज़िल की ओर
हम लौटकर आएँगे
आप के शहर में।


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