सुरेन्द्र कुमार सिंह चांस

कविता
आमंत्रण
एक दिन
एक पल
एक बार फिर
कविता
ख़ामोशी
ख़ामोशी बोलती है
दिन की डिमांड
दिन है या आप
ध्यान एक अवसर है आजकल
नया प्रेम
पत्थर
प्रेम की सम्भावना
माँ हो न!
यथार्थ
ये भी तेरा
विभाजन रेखा
विश्वास
शाम जब भी ढलती है
स्वीकार