ज़मीन कहाँ, आकाश कहाँ
आते हैं कब वो पास कहाँ ???
उठ जाती है हज़ार उँगलियाँ,
मेरी खुशी किसी को रास कहाँ???
पत्थर पे अक्स फूल के जो उभार दे,
ऐसे अब वो संगतराश कहाँ???
पतझर ही मिले जब भी मिले,
मेरे हिस्से के मधुमास कहाँ???
रुक जाओ के तफ़तीश कर लूँ ,
दिल कहाँ धड़कन कहाँ, मेरी साँस कहाँ???