|
शिव की सभा में आबरू-ए-पार्वती तो देख
छन रही भाँग, तमाशा-ए-मस्ती तो देख
आबरू-ए-पार्वती=पार्वती
की महानता
त्रिशूल ले कर महादेव तांडव करते हैं
शंकर की ताल पे तरन्नुमे-हस्ती तो देख
तरन्नुमे-हस्ती=जीवन
का संगीत
जटाओं से बहता आ रहा है आबे-गंगा
हरिद्वार की कभी संगम की बस्ती तो देख
आबे-गंगा=गंगा
जल
राख मल कर सब को भी गुदगुदाये जाते हैं
भोले बाबा की तरब और सरमस्ती तो देख
तरब=लहर
जो था खिलौना, वही बन गया है लख़्ते-जिगर
गनेश पर त्रिलोचन की सरपरस्ती तो देख
लख़्ते-जिगर=जिगर
का टुकड़ा; सरपरस्ती=सरंक्षता
|