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12.01.2008
 

नज़्रे-शिव
डॉ. सुरेन्द्र भुटानी 


शिव की सभा में आबरू-ए-पार्वती तो देख
छन रही भाँग, तमाशा-ए-मस्ती तो देख
आबरू-ए-पार्वती=पार्वती की महानता

त्रिशूल ले कर महादेव तांडव करते हैं
शंकर की ताल पे तरन्नुमे-हस्ती तो देख
तरन्नुमे-हस्ती=जीवन का संगीत

जटाओं से बहता आ रहा है आबे-गंगा
हरिद्वार की कभी संगम की बस्ती तो देख
आबे-गंगा=गंगा जल

राख मल कर सब को भी गुदगुदाये जाते हैं
भोले बाबा की तरब और सरमस्ती तो देख
तरब=लहर

जो था खिलौना, वही बन गया है लख़्ते-जिगर
गनेश पर त्रिलोचन की सरपरस्ती तो देख
लख़्ते-जिगर=जिगर का टुकड़ा; सरपरस्ती=सरंक्षता


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