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01.22.2009
 

सूनी धरती  
सूरज तिवारी ’मलय’


हमारी इस सुंदर धरती पर
इंसानों की स्वार्थपरता
खत्म न कर दे -
पक्षियों की चहचहाहट
विलुप्त न हो जाये
माटी की सौंधी सौंधी महक
कृत्रिम रसायनों के प्रयोग से........

पावन, सुंदर पौधों में
जब खिलना ही बंद हो जाएगा
सुरभित / सुगंधित पुष्प
तब कफाँ बैठेंगी......?
तितलियाँ / भँवरे
रस चूसने के लिए।।

अपने ही आसमां के नीचे
हम हो रहे असुरक्षित
सूनी न हो जाए
संपूर्ण धरती हमारे कृत्यों से

तब आखिर........
क्या कर लेंगे हमारे
सेटेलाईट , मोबाईल, कम्प्यूटर
या कोई अन्य
अत्याधुनिक आविष्का
जब उन्हें नियंत्रित करने वाले
हाथ ही सलामत न रहें

तब फिर से राज करेंगे
डायनासोर जैसे सरीसृप
इस सूखी , वीरान हो रही
धरती पर और
जिम्मेदार होगा
आज का आधुनिक कहलाने वाला
हाइटेक इंसान ..... ।


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