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01.22.2009
 

समझ 
सूरज तिवारी ’मलय’


बच्चा जब तक
रहता है माँ के पास
डर नहीं रहता
उसे किसी का
माँ की आँचल में
सुरक्षित महसूस करता है
अपने आप को
नही जानता वह
आधुनिक इंसान के
परमाणु बमों को
आग्नेयास्त्रों को
वह तो बस माँ की
गोद को ही जानता है ।
माँ भी
बच्चे के लिए
भूल जाती है
अपना सब कुछ
पूर्णतः समर्पित होती है
बच्चे के लिए
माँ की ममता के आगे
हार भले ही न माने
आज के परमाणु बम
या मिसाइल
जो लाखों मील तक
प्रहार कर देते हैं
लेकिन हार मान जाते हैं
वे इंसान जो खुद ही
बनाते हैं इन
आग्नेयास्त्रों को
दुनिया को खत्म करने के लिए ।।


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