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02.07.2009
 

कृत्रिमता 
सूरज तिवारी ’मलय’


आदमी अब
नहीं पहचानता
बाहर के आदमी को
शायद पहचानकर भी
अनजान बन जाता है

आदिकाल में
आदमी संगठित हो
रहता था जंगलों में
जंगली जानवरों से बचने को
अब झुँड से अकेले हो
खुद बन गया है जंगली
थाम लिया उसने आग्नेयास्त्र
खतरनाक हैं जो जंगली जानवरों के
हिंसक नाखुनों से भी
आगे निकल गया पाशविकता में
जंगली जानवरों से भी
आदमी अब आदमी को ही
निगलने लगा।

जंगलों को अब मानने लगा
इंसान ज्यादा सुरक्षित
समझने लगा शायद
जंगली जानवरों से कहीं ज्यादा
हिंसक हो गया है
आज का
आधुनिक कहलाने वाला
हाईटेक मानव ।।


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