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02.07.2009
 

जीवन का सत्य 
सूरज तिवारी ’मलय’


धरती में
बो दिये जाते हैं बीज
समय-समय पर
उसमें डालकर खाद-पानी
हम सुरक्षा करते हैं
इंतज़ार करते हैं
कब बड़ा हो वृक्ष बन जाए
वह नन्हा सा बीज।
और हम इसकी छाया तले
आराम कर सकें
खा सकें उस वृक्ष के
पके फल जी भर कर।

बुझा सकें अपनी
अतृप्त इच्छाओं को
फलों से निकले
बीज को फिर से बोकर
तैयार कर सके
नये नये वृक्ष

इंसान ऐसे ही
तैयार करता है
अपने पुत्रों को
लाड़ प्यार से
का बड़ा होकर
अलग हो जाता है
माँ बाप से
न तो वृक्ष की
छाया और न फल
ही मिल पाता है
पेड़ लगाने वालों को
मिलता है तो बस
उस पेड़ की
टहनियाँ
उसकी चिता
जलाने को।।


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