जागो सूरज तिवारी ’मलय’
उठो, जागो, देश को धर्म, संस्कृति के नाम पर इतना मत बाँटो सर्वे भवन्तु सुखिनः की सोच वाले देश को अपने स्वार्थ के लिए वोटों की खातिर वर्ण, कौम, धर्म, सम्प्रदाय में इतना गर बाँटोगे एक दिन तुम स्वयं अपना घर भी जला हुआ पाओगे ।