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एक समय था
जब हिरण्याक्ष ने
अपहृत कर धरा को
छुपा दिया था समुद्र में
तब उसके उद्धार को
आए थे विष्णु
वाराह का रूपधर
धरती मुक्त हुई थी
हिरण्याक्ष के अत्याचार से
आज हर इंसान स्वयं ही
बन गया है हिरण्याक्ष
तभी तो वह
काट रहा लगातार
हरे भरे वृक्षों को
जब नहीं रहेंगे पृथ्वी पर
हरे भरे पेड़ पौधे
तब धरती के गर्म होने से
पिघलेंग बर्फ के ग्लेशियर
डूबेगी यह पृथ्वी
समुद्र में
और तब इसके लिए
ज़िम्मेदार होगा
आज का अति आधुनिक
कहलाने वाला
इंसान हिरण्याक्ष के रूप में
फिर पता नहीं
कौन आएगा इसके
उद्धार हेतु ।।
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