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04.05.2009
 

चरित्र 
सूरज तिवारी ’मलय’


गुप्ता साहब आज सुबह से बड़े ही सलीके से तैयार हो रहे थे। उनकी तैयारी देख मिसेज गुप्ता पूछ बैठी अरे अनिल आखिर क्या बात है आज कुछ ज्यादा ही तैयारी हो रही है। गुप्ता जी मन ही मन मुस्कुरा दिये और कहा, अरे नीतू क्या बताऊँ आज हमारे नगर के कुछ जागरूक युवाओं द्वारा नशामुक्ति अभियान के तहत एक आयोजन किया जा रहा है और मुझे उसमें विशिष्ट अतिथि के तौर पर बुलाया गया है। मुझे उक्त कार्यक्रम में शराब से शरीर को होने वाली हानियों पर भाषण भी देना है। कहते हुए गुप्ता जी ने आलमारी से काले रंग का एक बेहतरीन सूट निकाल लिया। भोजन करके वे तैयार होकर गंतव्य के लिए चल पड़े।

सभा समय से प्रारंभ हुई। युवाओं की तैयारी देखने लायक थी। लोग एक एक करके भाषण देने लगे। गुप्ताजी की बारी आने पर उन्होनें शराब से शरीर को होने वाली हानियों के बारे में लोगों के बीच एक अच्छा खासा भाषण दिया। लोग उनकी बातों से काफी प्रभावित हुए और उन्होनें तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनके भाषण का ज़ोरदार स्वागत किया। गुप्ता जी को लौटते-लौटते रात हो गई। घर आते ही उनको लगा मानो उनका शरीर टूट सा रहा है। और थकान दूर करने के लिए उन्होनें विदेशी शराब की एक महँगी बोतल से ग्लास में उसे डाल एक ही घूँट में गटक गये।


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